वैश्नवी अडकर ने रचा इतिहास, आईटीएफ डब्ल्यू100 फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनीं

बेंगलुरु
 भारत की युवा टेनिस खिलाड़ी वैश्नवी अडकर ने केपीबी ट्रस्ट आईटीएफ विमेंस ओपन डब्ल्यू100 बेंगलुरु 2026 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए डब्ल्यू100 स्तर के टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनने का गौरव प्राप्त किया है। 21 वर्षीय पुणे की खिलाड़ी ने सेमीफाइनल में थाईलैंड की दूसरी वरीयता प्राप्त और विश्व नंबर 126 लैनलाना तारारुडी को सीधे सेटों में 6-3, 6-3 से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई।

विश्व रैंकिंग में 690वें स्थान पर काबिज और वाइल्डकार्ड के रूप में खेल रहीं अडकर का यह अभियान बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने फाइनल तक पहुंचने के दौरान दो शीर्ष-150 और एक शीर्ष-250 रैंकिंग वाली खिलाड़ी को मात दी। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले सानिया मिर्जा 2009 में पटाया में डब्ल्यूटीए इंटरनेशनल (बाद में डब्ल्यूटीए 250) टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची थीं।

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सेमीफाइनल मुकाबले की शुरुआत संतुलित रही, लेकिन पहले सेट के सातवें गेम में अडकर ने गहरे बेसलाइन रिटर्न के जरिए दबाव बनाया, जिससे तारारुडी ने डबल फॉल्ट सहित कई गलतियां कीं और भारतीय खिलाड़ी को महत्वपूर्ण ब्रेक मिल गया। आत्मविश्वास से भरी अडकर ने 6-3 से पहला सेट अपने नाम किया।

दूसरे सेट में भी उन्होंने आक्रामक रुख बरकरार रखा। छठे गेम में शानदार बैकहैंड विनर्स के सहारे ब्रेक हासिल कर 4-2 की बढ़त बनाई। दबाव की स्थिति में संयम दिखाते हुए अडकर ने 6-3 से सेट और मैच अपने नाम कर लिया।

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मैच के बाद अडकर ने कहा कि वह अब भी फाइनल में पहुंचने की उपलब्धि को आत्मसात करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उनका ध्यान केवल एक-एक अंक पर केंद्रित रहने पर था और वह मिले अवसर का पूरा फायदा उठाना चाहती थीं।

दूसरे सेमीफाइनल में बेल्जियम की तीसरी वरीयता प्राप्त हैने वैंडविंकेल ने पोलिना इयात्सेंको को 6-4, 7-6 (5) से हराकर फाइनल में प्रवेश किया, जहां उनका मुकाबला अडकर से होगा।

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डबल्स वर्ग में जापान की जोड़ी मिसाकी मत्सुदा और एरी शिमिज़ु ने भारत की अंकिता रैना और इंडोनेशिया की प्रिस्का मेडेलिन नुग्रोहो की जोड़ी को 6-4, 3-6, 10-5 से हराकर खिताब जीता। विजेता जोड़ी को 100 डब्ल्यूटीए रैंकिंग अंक और 5,573 अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। बेंगलुरु में खेले जा रहे इस टूर्नामेंट में अडकर की उपलब्धि भारतीय महिला टेनिस के लिए एक नई उम्मीद के रूप में देखी जा रही है।

 

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